(3).jpg?resize=576%2C324&ssl=1)
नई दिल्ली – भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सैन्य तनाव ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाई जा रही फर्जी खबरों पर अब डसॉल्ट एविएशन और फ्रांस सरकार ने स्पष्टता दी है।
डसॉल्ट एविएशन के चेयरमैन और सीईओ एरिक ट्रैपियर ने इन अफवाहों को पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि भारत ने इस ऑपरेशन में कोई राफेल विमान नहीं खोया है। उन्होंने यह भी कहा कि “राफेल की क्षमताओं पर कोई सवाल नहीं है। यह विमान हर मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है।”
🌐 फ्रांस ने खोली पाकिस्तान और चीन की साजिश की पोल
फ्रांसीसी खुफिया एजेंसियों और रक्षा मंत्रालय ने एक संगठित साइबर-प्रोपेगेंडा अभियान का खुलासा किया है, जिसके पीछे पाकिस्तान और चीन का हाथ है। इस अभियान में:
-
AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनी नकली तस्वीरें और वीडियो
-
1,000 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट
-
राफेल के मलबे के बनावटी चित्र
-
मनगढ़ंत रिपोर्ट्स और ब्लॉग्स शामिल हैं
इनका उद्देश्य राफेल की साख को नुकसान पहुंचाना और चीनी लड़ाकू विमानों को ज्यादा सक्षम दिखाना है।
🤔 राफेल क्यों बना झूठे प्रचार का निशाना?
फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राफेल की विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय मांग से परेशान होकर चीन और पाकिस्तान ने यह दुष्प्रचार शुरू किया है। ऐसे देश जो राफेल खरीदने की सोच रहे हैं, उन्हें भ्रमित करने के लिए ये अभियान चलाया जा रहा है।
मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर लिखा:
“राफेल केवल इसलिए निशाने पर है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बेहतरीन फाइटर जेट्स में से एक है। इसे प्रमुख सैन्य अभियानों में सफलता पूर्वक तैनात किया गया है।”
🇮🇳 भारत के लिए क्या मायने रखती है यह सफाई?
यह खुलासा भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि पाकिस्तान ने भारत के राफेल जेट को मार गिराया। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि यह सब झूठे प्रचार का हिस्सा था।
इस बयान से न केवल भारत की सैन्य प्रतिष्ठा मजबूत हुई है, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ कि राफेल जेट्स आज भी भारतीय वायुसेना की रीढ़ बने हुए हैं।
🔍 निष्कर्ष
-
कोई राफेल विमान नहीं गिरा है।
-
पाकिस्तान और चीन की फर्जी खबरों की साजिश नाकाम रही।
-
भारत के पास मौजूद राफेल जेट्स पूरी तरह सुरक्षित और सक्षम हैं।
-
यह घटना सूचना युद्ध (Information Warfare) का बड़ा उदाहरण बन चुकी है।
➡️ भारत को सतर्क रहकर ऐसे दुष्प्रचार से लड़ने की जरूरत है, ताकि उसकी सैन्य प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय विश्वास पर कोई आंच न आए।