
वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगामी चुनावों से पहले बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए 14 देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो कि 1 अगस्त 2025 से लागू होंगे। साथ ही उन्होंने भारत को लेकर एक सकारात्मक बयान भी दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच एक बड़े व्यापार समझौते की संभावना अब बेहद नजदीक है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल मचा दी है।
🔴 टैरिफ का बड़ा फैसला: 14 देश निशाने पर
ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल के माध्यम से 14 देशों को भेजे गए पत्रों का खुलासा किया, जिनमें थाईलैंड, म्यांमार, बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, लाओस, इंडोनेशिया, ट्यूनीशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, सर्बिया और कंबोडिया शामिल हैं।
➤ इन देशों पर लगे टैरिफ:
| देश | टैरिफ (%) |
|---|---|
| थाईलैंड, कंबोडिया | 36% |
| बांग्लादेश, सर्बिया | 35% |
| म्यांमार, लाओस | 40% |
| इंडोनेशिया | 32% |
| दक्षिण अफ्रीका, बोस्निया | 30% |
| जापान, मलेशिया, कजाकिस्तान, दक्षिण कोरिया | 25% |
ट्रंप ने कहा कि ये टैरिफ तब तक प्रभावी रहेंगे जब तक ये देश अमेरिका के साथ निष्पक्ष और पारस्परिक व्यापार नीतियां लागू नहीं करते। अगर इन देशों ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए, तो अमेरिका भी प्रतिक्रिया में दरें और बढ़ा देगा।
🟢 भारत के लिए राहत की खबर
ट्रंप ने इस मौके पर भारत को “एक रणनीतिक साझेदार” बताते हुए कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौता जल्द हो सकता है। उन्होंने कहा:
“हम भारत के साथ व्यापार समझौते के बहुत करीब हैं। अमेरिका और भारत दोनों के लिए यह लाभकारी रहेगा।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत को लेकर टैरिफ लगाए जाने की अटकलें लग रही थीं। यह समझौता भारत के लिए एक आर्थिक अवसर हो सकता है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच मिल सकती है और भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध और मज़बूत हो सकते हैं।
⚠️ टैरिफ नीति का उद्देश्य
ट्रंप की यह नीति “America First” एजेंडे का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत वह चाहते हैं कि अमेरिका को व्यापार में कोई नुकसान न हो और हर देश “फेयर ट्रेड” (न्यायसंगत व्यापार) करे। ट्रंप ने कहा:
“जो देश हमारे साथ व्यापार करना चाहते हैं, उन्हें टैरिफ देना होगा। हम निष्पक्ष रहेंगे, लेकिन अमेरिका को अब नुकसान नहीं होने देंगे।”
⏳ 1 अगस्त तक मोहलत
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी पुष्टि की कि जिन देशों को टैरिफ नोटिस दिए गए हैं, उन्हें 1 अगस्त तक का समय दिया गया है। यह मोहलत इसलिए दी गई है ताकि ये देश अमेरिका के साथ बातचीत कर किसी समझौते पर पहुंच सकें।
📉 टैरिफ से वैश्विक बाज़ार पर असर
जब पहली बार अप्रैल में ट्रंप ने टैरिफ का ऐलान किया था, तो अमेरिकी शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट में अस्थिरता देखी गई थी। इसके बाद डेडलाइन बढ़ाकर 1 अगस्त कर दी गई। अब ट्रंप प्रशासन चाहता है कि हर देश तय समयसीमा के भीतर जवाब दे और अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौता करे।
📌 निष्कर्ष
ट्रंप की टैरिफ नीति ने विश्व व्यापार संतुलन को चुनौती दी है। भारत के लिए यह समय निर्णायक हो सकता है। यदि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने में सफल होता है, तो दोनों देशों के लिए द्विपक्षीय व्यापार के नए द्वार खुल सकते हैं। लेकिन जिन देशों पर टैरिफ लगे हैं, उन्हें अब अमेरिका के दबाव में अपने आर्थिक और कूटनीतिक समीकरणों की समीक्षा करनी होगी।