गुजरात में बड़ा हादसा: वडोदरा-आणंद को जोड़ने वाला गंभीरा पुल टूटा, दो की मौत, कई गाड़ियां नदी में समाईं

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वडोदरा, गुजरात। बुधवार सुबह वडोदरा और आणंद को जोड़ने वाला महिसागर नदी पर बना ‘गंभीरा पुल’ अचानक टूट गया, जिससे एक बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए, जबकि कई वाहन नदी में समा गए। अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और नदी में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

🔴 हादसे का समय और घटनास्थल

घटना बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे पादरा क्षेत्र में हुई, जब गंभीरा पुल का एक हिस्सा अचानक ध्वस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो ट्रक, एक कार और कुछ दोपहिया वाहन पुल के साथ नदी में गिर गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


🚨 रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

पुलिस, एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। गोताखोरों की मदद से नदी में गिरे लोगों और वाहनों की तलाश जारी है। अब तक चार लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि कुछ लोगों की तलाश अभी भी जारी है।

पादरा के पुलिस निरीक्षक विजय चरण ने पुष्टि की है कि कम से कम चार वाहन नदी में गिरे हैं और एक ट्रक अब भी पुल के बीचोंबीच लटका हुआ है। नदी का तल गहरा और चौड़ा होने की वजह से यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कुल कितने वाहन हादसे का शिकार हुए हैं।


🏗️ 43 साल पुराना था पुल

महिसागर नदी पर बना यह गंभीरा पुल लगभग 43 वर्ष पुराना था और इसे ‘सुसाइड पॉइंट’ के नाम से भी जाना जाता था। यह पुल काफी समय से जर्जर स्थिति में था और लगातार इसकी शिकायतें भी की जा रही थीं, लेकिन फिर भी इसे यातायात के लिए बंद नहीं किया गया।


🛣️ टोल टैक्स से बचने के लिए भारी वाहन कर रहे थे इस्तेमाल

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सौराष्ट्र से आने वाले भारी वाहन टोल टैक्स से बचने के लिए इस पुल का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे पुल पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा था। प्रशासन की लापरवाही के कारण इसकी मरम्मत नहीं की गई, जबकि पुल के समानांतर एक नया पुल बनाने की योजना पहले ही स्वीकृत हो चुकी थी, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।


🗣️ प्रशासनिक चूक पर उठे सवाल

हादसे ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानसून शुरू होने से पहले भी इस पुल पर कोई विशेष जांच या एहतियात नहीं बरती गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल लंबे समय से हिल रहा था और उसकी हालत देखकर किसी भी समय हादसे की आशंका बनी हुई थी।


📞 हेल्पलाइन नंबर जारी

स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्यों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, ताकि किसी भी नागरिक को जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता दी जा सके। इसके अलावा, नदी में फंसे लोगों के परिजन घटनास्थल पर जमा हो गए हैं और अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।


📌 निष्कर्ष

गंभीरा पुल हादसा सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर फेल्योर नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का घातक उदाहरण है। समय रहते अगर पुल की मरम्मत या यातायात बंद कर दिया गया होता, तो शायद आज जानें बचाई जा सकती थीं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस हादसे से क्या सबक लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

Posted on 9th July 2025

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